योग्याकार्ता (इंडोनेशिया) | 9वीं शताब्दी की भव्यता, नक्काशी की बारीकियां और सदियों पुराना भारत-इंडोनेशियाई सांस्कृतिक मेल—आज योग्याकार्ता के प्रंबानन मंदिर परिसर में यही दृश्य जीवंत हो उठा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रंबानन मंदिर में दर्शन किए। इस यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि उनके साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति श्री प्रबोवो सुबियांतो भी मौजूद थे।
साझा विरासत पर भारत की मुहर
मंदिर परिसर में एक विशेष समारोह के दौरान, दोनों नेताओं ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संचालित होने वाली संरक्षण और जीर्णोद्धार परियोजना का शिलान्यास किया। एक पट्टिका का अनावरण करते हुए, दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि यह केवल पत्थरों का जीर्णोद्धार नहीं, बल्कि दोनों देशों के साझा सभ्यतागत मूल्यों को बचाने का संकल्प है। यह महत्वपूर्ण परियोजना राष्ट्रपति प्रबोवो की 2025 की भारत यात्रा के दौरान बनी सहमति का परिणाम है।

इतिहास के पन्नों में प्रंबानन: त्रिदेवों का भव्य धाम
प्रंबानन मंदिर परिसर महज एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि इंडोनेशिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सबसे बड़ा प्रमाण है।
- निर्माण काल: इसका निर्माण 9वीं शताब्दी में हुआ था।
- समर्पण: यह विशाल मंदिर परिसर हिंदू धर्म के त्रिदेवों—भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित है।
- स्थापत्य कला: अपनी ऊंची और नुकीली संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध, यह परिसर वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है जो प्राचीन काल में भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच प्रगाढ़ संबंधों को दर्शाता है।
भारत का अनुभव, विश्व की धरोहर
दक्षिण-पूर्व एशिया में सांस्कृतिक स्थलों को पुनर्जीवित करने में भारत का रिकॉर्ड रहा है। एएसआई (ASI) ने इससे पहले बोरोबुदुर मंदिर परिसर के दस्तावेजीकरण में बड़ी भूमिका निभाई थी। अब प्रंबानन के संरक्षण का बीड़ा उठाकर भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह अपनी और दुनिया की साझा सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पीएम मोदी का यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक मंदिर के वैभव को और अधिक चमक प्रदान करेगा।



