रोहित और दलपत की संघर्ष से सफलता तक की दास्तान: अभावों को मात दे बने वरिष्ठ अध्यापक, मेघवाल समाज का बढ़ाया मान
रानीवाड़ा / टीकम पाल
सरकारी स्कूल की लकड़ी की बेंचों से उठकर उसी शैक्षणिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लेने वाले रानीवाड़ा क्षेत्र के दो युवाओं ने अपनी कड़ी मेहनत से यह साबित कर दिखाया है कि सफलता कभी भी संसाधनों की मोहताज नहीं होती, इसके लिए केवल एक मजबूत जज्बे की जरूरत होती है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित वरिष्ठ अध्यापक (गणित) भर्ती परीक्षा में रानीवाड़ा क्षेत्र के दो होनहार युवाओं—रोहित कुमार (पुत्र विरमा राम, निवासी जोडवास) और दलपत कुमार (पुत्र राजा राम, निवासी रानीवाड़ा खुर्द)—ने शानदार उच्च रैंक के साथ सफलता हासिल कर पूरे अंचल का नाम रोशन किया है।

संघर्ष और अभावों से भरी पृष्ठभूमि
दोनों ही युवा बेहद साधारण किसान परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। बचपन से ही इन्होंने आर्थिक तंगी और तमाम अभावों का सामना करते हुए अपनी शिक्षा पूरी की। इस सफलता की सबसे अनूठी और प्रेरणादायक बात यह है कि रोहित और दलपत दोनों ने अपनी प्राथमिक शिक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक की पूरी पढ़ाई राजकीय विद्यालयों से ही पूरी की है।

खास बात यह है कि चयन के बाद अब ये दोनों प्रदेश के उन्हीं सरकारी विद्यालयों में अपनी सेवाएं देंगे, जहां से इन्होंने शिक्षा की इबारत पढ़नी सीखी थी यानी "जहां से ज्ञान लिया, अब वहीं ज्ञान बांटेंगे।"
बिना कोचिंग के गढ़ी सफलता की इबारत
घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण दोनों युवा कभी भी किसी महंगे कोचिंग संस्थान का रुख नहीं कर सके। खेतों में अपने माता-पिता का हाथ बंटाने के बाद जो समय बचता, उसे वे अपनी पढ़ाई को समर्पित करते थे।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म का सही उपयोग: स्मार्टफोन और यूट्यूब को ही अपना गुरु बनाया और ऑनलाइन माध्यमों से तैयारी की।
- अथक परिश्रम: रात-रात भर जागकर खुद के नोट्स तैयार किए और कठिन अवधारणाओं को समझा।
- संकल्प: विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कभी भी अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकाया।
युवाओं के लिए सफलता के मूलमंत्र
गांव पहुंचने पर दोनों युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों से मुलाकात की और उन्हें सफलता के जरूरी टिप्स दिए:
"नियमितता सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। रोजाना 6 से 8 घंटे की एकाग्र पढ़ाई, पुराने प्रश्नपत्रों को हल करना और अपनी कमजोरियों पर काम करना बेहद जरूरी है। कोचिंग के बिना भी केवल लगन और अनुशासन से मुकाम हासिल किया जा सकता है।"
उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि माता-पिता का सम्मान करें, कभी हार न मानें और पूरी शिद्दत के साथ अपने सपनों को पूरा करने में जुट जाएं।
क्षेत्र में जश्न का माहौल और समाज में गर्व
रोहित और दलपत की इस ऐतिहासिक सफलता से जोडवास और रानीवाड़ा खुर्द गांव सहित पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। मेघवाल समाज के प्रबुद्धजनों ने इसे गर्व का पल बताते हुए कहा कि इन दोनों युवाओं ने अपनी मेहनत के दम पर पूरे समाज और प्रदेश का सिर ऊंचा कर दिया है।
स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि दोनों छात्र बचपन से ही मेधावी, आज्ञाकारी और अनुशासित रहे हैं। समाजसेवियों का मानना है कि रोहित और दलपत की यह कहानी उन हजारों ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए एक मजबूत प्रेरणा है जो संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। इनकी यह सफलता चीख-चीख कर यह संदेश दे रही है कि यदि इरादे बुलंद हों, तो सरकारी स्कूल भी किसी आरपीएससी चयन फैक्ट्री से कम नहीं हैं। फिलहाल दोनों के निवास स्थान पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
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