जसवंतपुरा। वन्यजीवों के प्रति मानवीय संवेदना और वन विभाग की तत्परता का एक अद्भुत उदाहरण आज जसवंतपुरा में देखने को मिला, जब एक गहरे कुएं में गिरे सियार को बचाने के लिए वन विभाग की टीम ने अपनी जान की परवाह किए बिना मोर्चा संभाला। इस पूरे ऑपरेशन के नायक रहे वनरक्षक प्रभुराम जाट, जिनकी बहादुरी ने एक बेजुबान की जान बचाई और वन्यजीव प्रेमियों का दिल जीत लिया।
ऐसे शुरू हुआ बचाव अभियान
घटना आज सुबह की है। सावीदर गांव के निवासी भंवर लाल जी पुरोहित ने दांतलावास वन नाका प्रभारी चतराराम को सूचना दी कि उनके खेत में बने कुएं में एक सियार गिर गया है। यह खबर मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। बिना एक पल गंवाए, वनपाल चतराराम के नेतृत्व में वनरक्षक प्रभुराम जाट, देवी सिंह और शैलेन्द्र सिंह की टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गई।
मौके पर पहुंचकर टीम ने देखा कि कुआं काफी गहरा है और सियार अंदर फंसा हुआ है, घबराया हुआ है। प्रारंभिक प्रयास के तौर पर सियार को पिंजरे में फंसाकर बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन सियार की घबराहट और कुएं की स्थिति के कारण यह संभव नहीं हो पाया।

प्रभुराम की दिलेरी और स्थानीय सहयोग
जब सभी प्रयास विफल होते दिखे, तब वनरक्षक प्रभुराम जाट ने एक साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर खुद कुएं में उतरने का फैसला किया। प्रभुराम की इस दिलेरी को देख स्थानीय निवासी जितेंद्र पुत्र प्रभु जी और सूजाराम पुत्र बगदाजी भी सहयोग के लिए आगे आए और कुएं में उतर गए। यह नजारा किसी फिल्म के रोमांचक दृश्य से कम नहीं था, जहां इंसान और जानवर के बीच का बंधन स्पष्ट दिख रहा था।
काफी मशक्कत और सूझबूझ के साथ, टीम ने सियार के सीने पर रस्सी बांधी और उसे धीरे-धीरे सुरक्षित रूप से कुएं से बाहर निकाला। सियार को बाहर आते ही सभी ने राहत की सांस ली। यह क्षण न केवल वन विभाग के लिए बल्कि वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए गर्व और खुशी का था।
जसवंतपुरा टीम की पहचान बनी त्वरित कार्रवाई
यह कोई पहली बार नहीं है जब जसवंतपुरा वन विभाग की टीम ने ऐसा सराहनीय कार्य किया हो। श्री सुंधामाता कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र, जिसे राज्य सरकार ने संरक्षित क्षेत्र घोषित कर रखा है, में कई दुर्लभ और महत्वपूर्ण वन्यजीव निवास करते हैं। ऐसे में, इन जीवों के बचाव के लिए अक्सर ऐसे अभियानों की आवश्यकता पड़ती रहती है। जसवंतपुरा की वन विभाग की टीम अपनी अलर्ट और अपडेट मोड पर रहने की प्रवृत्ति के लिए जानी जाती है, और यही कारण है कि वे हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।
वन्यजीव प्रेमियों ने इस सफल बचाव अभियान के लिए वन विभाग की टीम, विशेषकर वनरक्षक प्रभुराम और उनके स्थानीय सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति और उसके जीवों का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, और जब ऐसे समर्पित लोग इस कार्य में जुटते हैं, तो सफलता निश्चित मिलती है।



