जसवंतपुरा (जालौर)। मरूधरा के अन्नदाता अपनी जायज मांगों को लेकर अब रणक्षेत्र में उतर आए हैं। भारतीय किसान संघ, तहसील जसवंतपुरा के बैनर तले उपखण्ड मुख्यालय के सामने चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आज दूसरे दिन भी जारी रहा। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसानों के हौसले बुलंद हैं, वहीं प्रशासन के साथ हुई पहले दौर की वार्ता विफल रहने से किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्रमुख मांगें: पानी, बिजली और जंगली जानवरों का त्रास
तहसील अध्यक्ष नरसाराम दांतलावास के नेतृत्व में किसान 10 सूत्री मांग पत्र पर अड़े हुए हैं:
- नर्मदा नहर का समाधान: नर्मदा नहर के ओवरफ्लो पानी को लिफ्ट नहर के जरिए जसवंतपुरा के बीठन, सिनधरा, चेकला और राजीकावास जैसे बांधों में भरने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है。
- दिन में बिजली की दरकार: भालू अभयारण्य क्षेत्र होने के कारण किसानों को रात में जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। किसानों की मांग है कि उन्हें दिन के समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
- फसल बीमा और भ्रष्टाचार: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर प्रीमियम तो काटा जा रहा है, लेकिन ‘क्रॉप कटिंग’ के समय अधिकारी और कंपनियां सांठ-गांठ कर खराब शून्य बता देते हैं, जिससे किसानों को मुआवजा नहीं मिल रहा।
- अन्य मांगें: जल जीवन मिशन के तहत अधूरी पाइप लाइनों को जोड़ना, बंदरों व भालुओं के आतंक से निजात, कृषि भूमि के रास्तों का विवाद सुलझाना और बिजली दरों में समानता लाना शामिल है।
प्रशासनिक वार्ता बेनतीजा, आंदोलन की चेतावनी
सोमवार, 12 जनवरी 2026 से शुरू हुए इस धरने को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के कारण वार्ता विफल रही। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों का निस्तारण नहीं होता, वे टस से मस नहीं होंगे।
धरने पर मौजूद प्रमुख चेहरे: इस प्रदर्शन में राबाराम (तहसील मंत्री), सोमाराम चौधरी (प्रांत उपाध्यक्ष), लक्ष्मणराम, जोरसाराम, जगाराम, भोमाराम, भगवानाराम, शंकराराम, अजाराम कलबी और प्रतापसिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में किसान प्रतिनिधि मौजूद हैं。



