रानीवाड़ा (जालोर): जब प्रकृति अपना प्रचंड रूप दिखाती है और लोग साये की ठंडक में शरण लेते हैं, ऐसे में राजस्थान-गुजरात सीमा पर स्थित भाटीब मठ के महंत विष्णुपुरी महाराज तपस्या के अद्वितीय साहस और समर्पण का परिचय दे रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच, जहां तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, वहां महंत विष्णुपुरी महाराज 41 दिनों तक चलने वाली अग्नि तपस्या में जुटे हैं।
प्रचंड तपस्या की अद्वितीय विधि: विष्णुपुरी महाराज हर दिन सुबह 11:30 बजे से दोपहर 3 बजे तक अपने चारों ओर जलती हुई अग्नि के नौ धूणों के बीच बैठते हैं। यह तपस्या खुली जगह में, तेज धूप और चिलचिलाती गर्मी के बीच की जा रही है। इस कठोर साधना का उद्देश्य आत्मिक शांति प्राप्त करना और विश्व कल्याण की कामना करना है। महाराज की इस साधना ने न केवल स्थानीय लोगों में बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी जिज्ञासा और भक्ति की भावना जगा दी है।
श्रद्धालुओं का बढ़ता आकर्षण: प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु महाराज के दर्शन और उनकी तपस्या को देखने के लिए जागेश्वर महादेव मंदिर पहुंचते हैं। लोगों का मानना है कि उनके दर्शन मात्र से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। विष्णुपुरी महाराज के शिष्य बताते हैं कि उनके गुरु शंकरपुरी महाराज भी ऐसे ही तपस्वी संत थे और उन्होंने भी जीवन भर सादगी और कठोर साधना का अनुसरण किया।
महंत विष्णुपुरी महाराज का परिचय: चौहान कुल में जन्मे विष्णुपुरी महाराज का बचपन रानीवाड़ा के जाखड़ी गांव में बीता। साधारण जीवन से लेकर भाटीब मठ के महंत बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक रहा है। वर्तमान में वे न केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं, बल्कि अपनी कठोर साधना से मानवता और आध्यात्म की नई मिसाल भी पेश कर रहे हैं।



