भनक लगते ही नहीं ली रकम, लेकिन मांग के सत्यापन पर ब्यूरो ने दर्ज किया भ्रष्टाचार का मुकदमा
पूर्वजों की जमीन का नामांतरण दर्ज करवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे एक पीड़ित से रिश्वत मांगना महिला पटवारी को भारी पड़ गया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने दांतीवास पटवार हल्का की पटवारी श्रीमती ललिता के खिलाफ 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
विरासत नामांतरण के नाम पर अटका रखा था काम पीड़ित ने एसीबी जालोर में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके दादाजी के निधन के बाद फौतगी म्यूटेशन (विरासत नामांतरण) एवं भू-अधिकार हकत्याग म्यूटेशन दर्ज करने की एवज में पटवारी ललिता द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी। बिना सुविधा शुल्क दिए जायज काम को अटकाया जा रहा था।
सत्यापन में खुली पोल, भनक लगते ही पीछे हटी शिकायत मिलने पर एसीबी जालोर की टीम ने गोपनीय तरीके से रिश्वत की मांग का सत्यापन करवाया। सत्यापन के दौरान आरोपिया पटवारी द्वारा 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने की पुष्टि हो गई। हालांकि, ट्रैप कार्रवाई के दौरान पटवारी को एसीबी की भनक लग गई, जिसके चलते उसने ऐन वक्त पर नकदी लेने से हाथ खींच लिए।
मुख्यालय के निर्देश पर धारा 7 में मामला दर्ज रिश्वत राशि मौके पर बरामद न होने के बावजूद मांग के पुख्ता प्रमाण मिलने पर एसीबी जोधपुर रेंज की एसपी पी.डी. नित्या के सुपरविजन में जालोर एएसपी मांगीलाल राठौड़ ने विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भेजी। इसके बाद एसीबी मुख्यालय, जयपुर के निर्देश पर आरोपिया पटवारी ललिता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत प्रकरण संख्या 234/2026 दर्ज कर अग्रिम जांच शुरू कर दी गई है।









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