सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उपजे हालात पर रानीवाड़ा में महा-मंथन; पर्यावरण और आजीविका के बीच संतुलन की मांग
युवा हुंकार: अरावली केवल पहाड़ नहीं, हमारी जीवनदायिनी है; अस्तित्व पर आंच आई तो होगा आर-पार का संघर्ष
विशेष संवाददाता | रानीवाड़ा
विश्व की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखला और मरुधरा की ‘इकोलॉजिकल लाइफलाइन’ मानी जाने वाली अरावली के संरक्षण को लेकर अब क्षेत्र का युवा वर्ग लामबंद हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों और अरावली पर मंडराते पर्यावरणीय संकट को लेकर रानीवाड़ा कस्बे के रितीक होटल में एक उच्च-स्तरीय रणनीतिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में युवाओं ने एक स्वर में अरावली के अस्तित्व को बचाने और स्थानीय हितों की रक्षा के लिए सोमवार को रानीवाडा उपखंड मुख्यालय पर एक विशाल विरोध रैली निकालने और ‘आंदोलन का बिगुल’ फूंकने का निर्णय लिया है।
गहराता संकट: कानून, पर्यावरण और भविष्य की जद्दोजहद बैठक में उपस्थित प्रबुद्ध जनों और युवाओं ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि अरावली का क्षरण न केवल भौगोलिक नक्शे को बदल देगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को रेगिस्तान और जल संकट की आग में झोंक देगा। चर्चा का मुख्य केंद्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा खनन गतिविधियों और वन क्षेत्र को लेकर दिए गए हालिया निर्देश रहे। युवाओं का स्पष्ट मत था कि यह लड़ाई अब केवल अदालती आदेशों या प्रशासनिक फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम जनमानस के जीवन, आजीविका और भविष्य के अस्तित्व से जुड़ गई है।
“अरावली हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का मेरुदंड है” बैठक को संबोधित करते हुए युवा कांग्रेस नेता भरत सराधना ने ओजस्वी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “अरावली पर्वतमाला थार के रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकने वाली ‘ग्रीन वॉल’ और हमारे पर्यावरण संतुलन की आधारशिला है। यह जल संरक्षण और जैव विविधता का संरक्षक है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खनन और अतिक्रमण को लेकर जो असमंजस और भय का माहौल बना है, उस पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। हमें पर्यावरण भी चाहिए और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार भी। समाज को अब जागना होगा।”
रणनीति तैयार: डिजिटल और जमीनी स्तर पर मचेगा शोर आगामी सोमवार को प्रस्तावित रैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए बैठक में एक ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार किया गया।
- जागरूकता अभियान: रैली से पहले सोशल मीडिया पर कैंपेन, सेल्फी पॉइंट और पेम्प्लेट्स के जरिए जन-जन तक बात पहुंचाई जाएगी।
- ज्ञापन: प्रशासन और सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें अरावली संरक्षण, अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के स्थानीय प्रभावों पर पुनर्विचार की मांग की जाएगी।
- शांतिपूर्ण प्रदर्शन: युवाओं ने संकल्प लिया कि यह आंदोलन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में होगा, लेकिन इसकी गूंज जयपुर और दिल्ली तक सुनाई देगी।
सर्वदलीय एकजुटता: मंच पर दिखा सामाजिक समरसता का रंग अरावली के मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक दीवारें टूटती नजर आईं। बैठक में विभिन्न संगठनों के दिग्गजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो इस आंदोलन की गंभीरता को दर्शाता है। इस दौरान क्षत्रिय युवक संघ के फुलसिंह जाखड़ी, भाजपा नेता मंजीराम चौधरी, विश्व हिंदू परिषद के तहसील अध्यक्ष किशोर जोशी, व्यापार संघ अध्यक्ष छैलसिंह सोलंकी, राजू मोदी, कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष एडवोकेट मोइनुदीन खां, वरिष्ठ पत्रकार गुमानसिंह राव, पुरेश पटेल, रविन्द्रसिंह उमट, करणाराम देवासी और जोइताराम चौधरी सहित सैकड़ों जागरूक युवा और नागरिक मौजूद रहे।
अपील: “आने वाली पीढ़ी के लिए घर से निकलें” आयोजक मंडल ने रानीवाड़ा और आसपास के क्षेत्र के समस्त पर्यावरण प्रेमियों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और मातृशक्ति से अपील की है कि सोमवार को प्रस्तावित इस महा-रैली में अधिकाधिक संख्या में भाग लेकर अरावली के संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करें।



