जालोर जिले में बाल विवाह की रोकथाम के लिए एक अनूठा और प्रेरणादायक अभियान चलाया जा रहा है। सोसायटी फॉर ऑल राउंड डवलपमेंट ने धर्मगुरुओं को इस अभियान से जोड़कर एक नई मिसाल कायम की है। इस पहल का उद्देश्य न केवल बाल विवाह को रोकना है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाकर इसे जड़ से खत्म करना है।
अभियान की शुरुआत और सफलता: अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के मौसम को ध्यान में रखते हुए, संगठन ने विभिन्न धर्मों के पुरोहितों, मौलवियों और पादरियों के बीच जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य संदेश था कि बाल विवाह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों का हनन भी है। संगठन की निदेशक सुनीता शर्मा ने बताया कि धर्मगुरुओं से मिले सहयोग ने इस अभियान को अभूतपूर्व सफलता दिलाई है। आज जिले के मंदिरों और मस्जिदों के बाहर बोर्ड लगे हैं, जिन पर साफ लिखा है कि यहां बाल विवाह की अनुमति नहीं है।

धर्मगुरुओं की भूमिका: संगठन ने यह समझाया कि कोई भी बाल विवाह पुरोहितों के बिना संपन्न नहीं हो सकता। इसलिए, उन्हें इस अभियान का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी था। धर्मगुरुओं ने न केवल इस पहल का समर्थन किया, बल्कि खुद आगे बढ़कर बाल विवाह रोकने की शपथ भी ली।
कानूनी जागरूकता: सुनीता शर्मा ने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA), 2006 के तहत यह एक दंडनीय अपराध है। इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति—चाहे वह बाराती हो, कैटरर, डेकोरेटर, या विवाह संपन्न कराने वाला पुरोहित—को सजा और जुर्माना हो सकता है।

अभियान के प्रभाव:
- 398 बाल विवाह रोके गए: अकेले 2023-24 में जालोर जिले में 398 बाल विवाह रुकवाए गए।
- समाज में जागरूकता बढ़ी: अब लोग बाल विवाह को अपराध के रूप में देखने लगे हैं।
- धर्मगुरुओं का समर्थन: पंडित और मौलवी अब खुद बाल विवाह रोकने के लिए आगे आ रहे हैं।
2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य: यह अभियान जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) के ‘चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया’ कैंपेन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 2030 तक देश से बाल विवाह को खत्म करना है। JRC ने अब तक दो लाख से अधिक बाल विवाह रोके हैं और पांच करोड़ से ज्यादा लोगों को शपथ दिलाई है।
एक नई उम्मीद: यह पहल दिखाती है कि जब समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर काम करते हैं, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। जालोर जिले का यह अभियान पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकता है।
आगे की राह: यदि धर्मगुरु और समाज इसी तरह साथ मिलकर काम करें, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत पूरी तरह से बाल विवाह मुक्त हो जाएगा। यह अभियान न केवल बच्चों के अधिकारों की रक्षा कर रहा है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव की लहर भी ला रहा है।
जालोर से उठी यह नई पहल एक नई सुबह की ओर इशारा करती है।



