सर्किल न्यूज नेटवर्क
जालोर। जिला रसद अधिकारी (जिला उपभोक्ता संरक्षण अधिकारी) द्वारा पेट्रोल और डीजल की खुले कंटेनर, ड्रम या बोतलों में बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने के आदेश जारी किए गए हैं। भू-राजनीतिक परिस्थितियों और जमाखोरी का हवाला देकर जारी किए गए इस आदेश के बाद जिले के आम जनमानस, किसानों और छोटे व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। लोग प्रशासन के इस फैसले को ‘तुगलकी फरमान’ बता रहे हैं।

आदेश में क्या हैं कड़े निर्देश?
जिला रसद कार्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, जिले के सभी पेट्रोल पंप संचालकों को पाबंद किया गया है कि वे किसी भी सूरत में खुले कंटेनर, ड्रम या बोतलों में ईंधन न बेचें। इसके साथ ही सभी पंपों को 15 दिन का अनिवार्य CCTV बैकअप सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का उल्लंघन करने वाले डीलरों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और PESO विस्फोटक नियम, 2008 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
बिजली कटौती के बीच कैसे चलेगी खेती और धंधा?
प्रशासन के इस फैसले से ग्रामीण और व्यापारिक क्षेत्रों में व्यावहारिक संकट खड़ा हो गया है:
- मझधार में किसान: रानीवाड़ा सहित कई नहरी क्षेत्रों में पानी की प्रचुरता के चलते खेत जायद की बाजरे की फसल ले रहे है। ग्रामीण इलाकों में किसान खेतों में सिंचाई के लिए डीजल पंप सेट का इस्तेमाल करते हैं। मानसून से पहले सभी खेतों को ट्रैक्टर से जोता जा रहा है। ऐसे में डीजल की सर्वाधिक जरूरत रहती है। ट्रैक्टर और पंप के लिए बार-बार पूरे वाहन को पंप तक लाना व्यावहारिक रूप से असंभव है। किसान ड्रमों में ही डीजल ले जाते हैं, जिस पर अब रोक लग गई है।
- बोरिंग व्यवसाय ठप होने की कगार पर: बोरिंग मशीन संचालक और नलकूप खुदाई से जुड़े व्यवसाइयों के लिए भारी मात्रा में डीजल की जरूरत होती है। खुले में बिक्री बंद होने से उनका काम पूरी तरह प्रभावित होगा।
- जनरेटर और टेंट व्यवसाई परेशान: भीषण गर्मी के इस मौसम में अघोषित बिजली कटौती आम बात है। ऐसे में अस्पतालों, छोटे उद्योगों और शादियों में टेंट व लाइट संचालकों को जनरेटर चलाने के लिए केन या ड्रमों में ही डीजल लाना पड़ता है।
जनता की मांग: आम जनता और किसान संगठनों का कहना है कि कालाबाजारी रोकने के नाम पर आम आदमी को प्रताड़ित करना कतई उचित नहीं है। प्रशासन को इस आदेश में व्यावहारिक ढील देनी चाहिए ताकि जरूरी कार्यों के लिए लोगों को भटकना न पड़े।
वही, वाहन मालिकों, चालकों, बस संचालकों ने रसद विभाग के निर्णय की तारीफ कर कहा कि इससे संकट में आपूर्ति का संतुलन बना रहेगा।



