प्रधानाध्यापक भागीरथ चौधरी की अनूठी पहल; बच्चों की ‘पर्यावरण मित्र समिति’ करेगी रोज देखभाल, ग्रामीणों से भी की घर-घर परिंडे लगाने की अपील
रानीवाड़ा।
कस्बे के निकटवर्ती राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, पाल में भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए शुक्रवार को बेजुबान पक्षियों के लिए ‘परिंडा अभियान’ का शंखनाद किया गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक भागीरथ चौधरी ने परिसर में पहला मिट्टी का परिंडा बांधकर इस पुनीत कार्य की शुरुआत की।
प्रधानाध्यापक ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जीव दया का व्यावहारिक पाठ पढ़ाना है। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि वे इस तपती गर्मी में अपने घरों की छतों, बालकोनी और सार्वजनिक स्थानों पर परिंडे जरूर लगाएं।
स्टाफ ने ली जिम्मेदारी, बच्चों ने संभाली कमान
विद्यालय परिसर के विभिन्न छायादार स्थानों पर कुल 15 मिट्टी के परिंडे लटकाए गए हैं। जीव दया की इस मुहिम में पूरे स्टाफ ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शिक्षक गणपत लाल, ओमप्रकाश, विनोद कुमार, विक्रम कुमार, चंद्र जीत जाटव, प्रवीण कुमार और जयश्रीबेन सहित पूरे स्टाफ ने एक-एक परिंडे को गोद लेकर उसकी नियमित निगरानी की जिम्मेदारी ली है।
इसके साथ ही, विद्यालय के कक्षा 6 से 8 के छात्र-छात्राओं को मिलाकर एक “पर्यावरण मित्र समिति” का गठन किया गया है। यह समिति रोजाना सुबह परिंडों की सफाई करने और उनमें ताजा पानी भरने का काम करेगी। गर्मी के इस पूरे सीजन में व्यवस्था सुचारू रहे, इसके लिए विद्यालय प्रशासन द्वारा एक विशेष निगरानी रोस्टर भी तैयार किया गया है।
पोस्टर से जगाएंगे अलख, जुलाई में चलेगा वृक्षारोपण अभियान
प्रधानाध्यापक भागीरथ चौधरी ने कहा, “पक्षी हमारे पर्यावरण की शान हैं। इस भीषण गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए भटकते बेजुबानों के लिए आपका एक परिंडा, एक जीवन बचा सकता है।”
विद्यालय प्रशासन ने आगे की योजना साझा करते हुए बताया कि छात्र पोस्टर और स्लोगन के जरिए गांव के लोगों को भी जागरूक करेंगे। इसके अलावा, आगामी जुलाई महीने में मानसून की शुरुआत के साथ ही पक्षियों के अनुकूल और घने छायादार पेड़-पौधे लगाने के लिए एक बड़ा वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जाएगा।
इस खबर से प्रेरणा
“जीव दया ही सबसे बड़ा धर्म है” – पाल स्कूल की यह पहल हमें सिखाती है कि सरकार या प्रशासन के भरोसे बैठे रहने के बजाय, हम अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयासों से पर्यावरण और बेजुबान जीवों की रक्षा कर सकते हैं। बच्चों को बचपन से ही ऐसे संस्कारों से जोड़ना आने वाली पीढ़ी को संवेदनशील और प्रकृति प्रेमी बनाएगा। इस गर्मी में आइए हम सब भी अपने घरों के बाहर एक परिंडा लगाने का संकल्प लें।
रिपोर्ट – टीकम पाल



