• श्री रघुनाथ बिश्नोई मेमोरियल कॉलेज में सात दिवसीय विशेष शिविर शुरू • डॉ. चौधरी ने दी सीपीआर की ट्रेनिंग, कहा- आपातकाल में संयम ही सुरक्षा
सर्कल न्यूज नेटवर्क रानीवाड़ा। राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्थानीय श्री रघुनाथ बिश्नोई मेमोरियल कॉलेज में बुधवार को राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के सात दिवसीय विशेष शिविर का भव्य शुभारंभ हुआ। 17 दिसंबर 2025 को शुरू हुए इस शिविर में स्वयंसेवकों ने न केवल सेवा का संकल्प लिया, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के गुर भी सीखे।
छोटा कार्य भी देश सेवा का हिस्सा कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। बतौर विशिष्ट अतिथि राजकीय महाविद्यालय के आचार्य कुलदीप झुंझारिया ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एनएसएस देश सेवा का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि देशहित में किया गया हर छोटा कार्य देशभक्ति के दायरे में आता है, बशर्ते वह समर्पण भाव से किया जाए। सुंधामाता कॉलेज राजपुरा के प्राचार्य नरपतदान चारण ने सामुदायिक भावना के साथ संगठन बनाकर कार्य करने पर जोर दिया।

जीवन रक्षक: सीपीआर और फर्स्ट एड की दी जानकारी शिविर के दूसरे सत्र में भास्कर हॉस्पिटल रानीवाड़ा के मुख्य चिकित्सक डॉ. सुजाराम चौधरी ने स्वयंसेवकों को महत्वपूर्ण चिकित्सा जानकारी दी। उन्होंने सीपीआर (CPR) की प्रक्रिया का डेमो दिया और बताया कि हार्ट अटैक, सांप के काटने, जलने या करंट लगने जैसी स्थितियों में प्राथमिक उपचार कैसे दिया जाए। यह सत्र छात्रों के लिए बेहद ज्ञानवर्धक रहा।
श्रमदान कर दिया स्वच्छता का संदेश बी.एड. प्राचार्या डॉ. नीतू जैमिनी ने सात दिवसीय कार्ययोजना प्रस्तुत की और अतिथियों का आभार जताया। इसके बाद महाविद्यालय परिसर में श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें स्वयंसेवकों ने बढचढ (ड) कर हिस्सा लिया।
ये रहे मौजूद कार्यक्रम में कॉलेज प्राचार्य डॉ. सत्येन्द्र कुमार उब्बा, सहायक आचार्य कौशल्या उब्बा, विश्राम मीणा, गणपतराम वाघेला, जसपाल राणा ने भी एनएसएस की उपयोगिता पर विचार रखे। इस मौके पर डॉ. मुश्ताक खान सोर्या, नेनाराम सीरवी, सतीश कुमार, प्रकाश कुमार, भंवरलाल गर्ग, हितेश जीनगर, महेन्द्र गिरी, विक्रम कुमार और अशोक महान सहित समस्त स्टाफ व स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
इनसाइड स्टोरी: शिक्षा के साथ सुरक्षा भी आमतौर पर एनएसएस शिविरों में केवल श्रमदान और बौद्धिक सत्र होते हैं, लेकिन रानीवाड़ा के इस शिविर में ‘प्राथमिक उपचार’ की ट्रेनिंग को शामिल करना एक सराहनीय पहल है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर युवा सीपीआर जैसी तकनीक सीख जाएं, तो गांवों में आपात स्थिति के दौरान कई जानें बचाई जा सकती हैं।



