जालौर/रानीवाड़ा। भारतीय संस्कृति की आधारशिला और करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र ‘गौमाता’ को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और गौवंश संरक्षण के लिए अब समाज सड़क पर उतर आया है। सर्कल न्यूज़ नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, आज रानीवाड़ा में हजारों की संख्या में एकत्रित गौभक्तों और संतों ने ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत अपनी आवाज़ बुलंद की। रैली और संकीर्तन के साथ उपखंड कार्यालय पहुंचे गौभक्तों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक विस्तृत ज्ञापन SDM रानीवाड़ा को सौंपा।
क्या हैं गौभक्तों की प्रमुख मांगें?
अभियान के तहत सरकार के सामने रखी गई मांगें केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और आर्थिक आधार पर भी टिकी हैं। ज्ञापन में रेखांकित मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. पूर्ण गौहत्या बंदी और राष्ट्रमाता का सम्मान
अभियान की सबसे पहली और बुनियादी मांग है कि संपूर्ण भारत में गौहत्या पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जाए ताकि गौवंश पूरी तरह सुरक्षित हो सके। साथ ही, गौमाता को ‘राष्ट्र माता’ या ‘राष्ट्र धरोहर’ का सम्मानित पद प्रदान कर उनके गौरव को संवैधानिक मान्यता दी जाए।

2. केंद्रीय गौ सेवा मंत्रालय का गठन
गौवंश की सेवा और संरक्षण के लिए पूरे देश में एक समान नीति हो, इसके लिए केंद्रीय गौ सेवा मंत्रालय बनाने और एक सशक्त केंद्रीय कानून लागू करने की मांग की गई है।
3. गोबर और गोमूत्र का आर्थिक सुदृढ़ीकरण
- गो-आधारित कृषि: रासायनिक खेती को नियंत्रित कर गो-आधारित कृषि को बढ़ावा दिया जाए।
- अनिवार्य उपयोग: सरकारी भवनों और अस्पतालों में सामान्य पेंट की जगह गोबर पेंट और फिनायल की जगह गोनाईल का उपयोग अनिवार्य हो।
- अनुसंधान: कृषि विश्वविद्यालयों में गोबर और गोमूत्र पर शोध के लिए विशेष केंद्र बनाए जाएं।

4. गौशालाओं का स्वावलंबन और मनरेगा जुड़ाव
गौभक्तों ने मांग की है कि गौशालाओं को मनरेगा योजना से जोड़ा जाए ताकि वहां काम करने वाले ग्वालों को वेतन मिल सके और निर्माण कार्य हो सकें। इसके अलावा, गौशालाओं को बिजली बिल में विशेष छूट या निःशुल्क यूनिट देने का भी आग्रह किया गया है।
5. शिक्षा और स्वास्थ्य में पंचगव्य
- मिड-डे मील: विद्यार्थियों के मिड-डे मील में देशी गाय का शुद्ध दूध या पाउडर शामिल किया जाए।
- चिकित्सा: जिला स्तर पर अलग से पंचगव्य चिकित्सालयों की स्थापना हो और आयुर्वेदिक अस्पतालों में पंचगव्य औषधियां मुफ्त मिलें।
अभियान की आगामी रणनीति: रुकेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं
आज का यह ज्ञापन केवल शुरुआत है। अभियान की कार्ययोजना के अनुसार, यदि 10 जुलाई 2026 तक सरकार की ओर से सकारात्मक परिणाम नहीं मिलता है, तो 27 जुलाई को जिला मुख्यालयों पर फिर से प्रदर्शन होगा। संघर्ष का यह सिलसिला राजधानी दिल्ली तक जाएगा, जहाँ 27 फरवरी 2027 से करोड़ों गौभक्तों के जुटने का आह्वान किया गया है।
विशेष नोट: यह अभियान पूरी तरह से अहिंसक है और इसमें किसी भी प्रकार का दान या चंदा स्वीकार नहीं किया जाता है।
इस मौके पर पूरण भूतेश्वर मठ महंत गणेश गिरी महाराज, खाकी जी की वाडी महंत राजगिरी महाराज, संत माधवानंद महाराज, RSS के संघ कार्यवाह डॉ किशन जोशी, किसान नेता सैनीदान चारण, जितेंद्र सिंह डाभी, भावेश एम पुरोहित, बाबूलाल पुरोहित रोडा। सोमाराम महाराज धानोल, नवल सिंह देवड़ा, अमरसिंह जांगू, सुरेश धनपुरा, नेपाल सिंह कागमाला, नरेश जोशी, व्यापार संघ के अध्यक्ष छैल सिंह सोलंकी, किशोर जोशी VHP अध्यक्ष, सरपंच वरदाराम माली, हेमाराम जांगू, प्रदीप सिंह मालवाड़ा, नरेंद्र पुरोहित धानोल, परसराम ढाका, रमेश माली, विष्णुदान चारण, जेके पुरोहित, फूल सिंह देवड़ा, सहित बड़ी तादात में गोभक्त मौजूद रहे।गौभक्तों का स्पष्ट संदेश है कि जब तक गौमाता को उचित सम्मान और सुरक्षा नहीं मिल जाती, यह सेवा-यज्ञ जारी रहेगा।
एक नज़र इधर भी: अभियान से जुड़ने के लिए मिस कॉल करें – 9067777323।
इस ब्लॉग पोस्ट को लेकर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा मिलना चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर दें।



