जयपुर | 24 जून
राज्य की सहकारी बैंक यूनियनों ने खरीफ व रबी सीज़न के लिए वितरित अल्पकालीन फसली ऋण की देय तिथि को 30 जून से बढ़ाकर 31 अगस्त 2025 करने की मांग को लेकर सोमवार को प्रमुख शासन सचिव (सहकारिता) को ज्ञापन सौंपा।
राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्प्लाईज यूनियन और ऑफिसर्स एसोसिएशन की ओर से प्रस्तुत ज्ञापन में बताया गया कि प्रदेश के लगभग 9.63 लाख किसानों पर 3760 करोड़ रुपये का फसली ऋण बकाया है, जिसकी समयावधि बढ़ाना किसान और बैंकों—दोनों के हित में आवश्यक है।
एफएमएस पोर्टल बना चुनौती
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि एफएमएस पोर्टल पर तकनीकी समस्याओं और अत्यधिक लोड के चलते ऋण वसूली की प्रक्रिया बाधित हो रही है, जिससे न केवल बैंक कर्मचारियों को बल्कि किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में निर्धारित समयसीमा तक लक्ष्य प्राप्ति असंभव प्रतीत हो रही है।

ब्याज अनुदान राज्य सरकार वहन करे
सहकारी बैंक यूनियनों ने यह भी मांग की कि ऋण चुकता अवधि बढ़ाने से जो वित्तीय भार ब्याज अनुदान के रूप में उत्पन्न होगा, उसे बैंकों पर डालने के बजाय राज्य सरकार वहन करे। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि राज्य की सहकारी बैंकिंग प्रणाली पहले से आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है और उस पर अतिरिक्त बोझ उचित नहीं है।
सीबीएस ऑनलाइन प्रक्रिया समय पर हो
ज्ञापन में आग्रह किया गया कि 30 जून से पूर्व निर्णय लेकर सीबीएस ऑनलाइन प्रणाली में ऋण खाता अद्यतन की प्रक्रिया नियमित रूप से पूर्ण की जा सके, जिससे किसानों को आगे का ऋण समय पर प्राप्त हो सके।
प्रतिलिपि प्रेषित
ज्ञापन की प्रतिलिपि सहकारिता मंत्री के वरिष्ठ सहायक और राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को भी भेजी गई है।
समर्थन में बोले महासचिव
प्रांतीय महासचिव सूरज भान सिंह आमेर ने कहा, “यह महज़ तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों किसानों की आजीविका से जुड़ा विषय है। हमें विश्वास है कि सरकार समय रहते निर्णय लेकर राहत प्रदान करेगी।”



