रानीवाड़ा, जालोर: रानीवाड़ा तहसील का सबसे छोटा गांव, भापड़ी, आज भी अपने अस्तित्व और विकास के लिए संघर्ष कर रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि न तो गांव को पूर्ण दर्जा मिला है और न ही किसी एक ग्राम पंचायत में इसे सहायक का प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ है।
विकास के नाम पर केवल आश्वासन
गांव के लोगों का आरोप है कि राजनीतिक दल और नेता केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए इस मुद्दे को उठाते हैं, लेकिन किसी ने भी स्थायी समाधान की दिशा में काम नहीं किया। वर्तमान में भापड़ी, करड़ा ग्राम पंचायत से जुड़ा हुआ था, लेकिन परिसीमन के बाद इसे कोटड़ा के साथ जोड़ दिया गया।
कोटड़ा से जुड़ने की समस्या
गांव के लोगों को सरकारी कार्यों के लिए पंचायत समिति सरनाऊ जाना पड़ता है। भापड़ी से सरनाऊ पहुंचने के लिए वाया खारा, साकड़ और फिर सरनाऊ तक तीन वाहनों को बदलना पड़ता है, जिससे मध्यमवर्गीय और मजदूर वर्ग को काफी कठिनाई होती है।
गांव की प्रमुख समस्याएं – श्मशान भूमि और उच्च प्राथमिक विद्यालय का न होना। –
उप-स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक भवन की कमी। – पानी की आपूर्ति में बार-बार रुकावट और पाइपलाइन बिछाने के बाद भी सड़क की मरम्मत न होना। – गौचर भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण।
स्थानीय निवासियों की मांग भापड़ी गांव के निवासी, विशेष रूप से हिम्मत प्रजापति, ने प्रशासन से अपील की है कि गांव को पुनः करड़ा ग्राम पंचायत से जोड़ा जाए। कोटड़ा और सरनाऊ के दुर्गम मार्ग से राहत पाने के लिए यह कदम आवश्यक बताया जा रहा है।
आशा और अपील
भापड़ी की जनता ने बड़े विश्वास और आशा के साथ इस मुद्दे को प्रशासन के सामने रखा है। वे चाहते हैं कि उनकी मांगों पर त्वरित कार्यवाही हो और गांव को विकास की मुख्यधारा में लाया जाए



