देशभक्ति की मिसाल: पूर्व सरपंच पिता और वर्तमान सरपंच माँ के संस्कारों ने अभिषेक को बनाया भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट
Circle News Network
जालोर। कहते हैं कि रगों में अगर जुनून और रूह में वतन के प्रति मोहब्बत हो, तो आसमान की बुलंदियां भी कदमों में होती हैं। आहोर क्षेत्र के सामूजा गांव के युवा अभिषेक सिंह राठौड़ ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे मारवाड़ की माटी का मान बढ़ाया है। लेकिन यह सफलता केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक ऐसे माता-पिता के त्याग और संकल्प की जीत है, जिन्होंने अपने कलेजे के टुकड़े को वतन की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया।
संस्कारों की विरासत: जब माता-पिता बने मार्गदर्शक
अभिषेक की इस गौरवमयी यात्रा के पीछे उनके माता-पिता का व्यक्तित्व किसी प्रेरणा स्तंभ से कम नहीं है। अभिषेक के पिता कृष्णपाल सिंह, जो स्वयं सामूजा ग्राम के पूर्व सरपंच रह चुके हैं, और उनकी माता दीपिका कंवर, जो वर्तमान में सरपंच के रूप में जनता की सेवा कर रही हैं—दोनों ही समाज की बड़ी शख्सियतें हैं।
”एक माँ के लिए अपने बेटे को फौज की चुनौतीपूर्ण राह पर भेजना दुनिया का सबसे कठिन निर्णय होता है। लेकिन दीपिका कंवर ने ममता से ऊपर मातृभूमि की सेवा को रखा। यह उनके साहस का ही परिणाम है कि आज अभिषेक के कंधों पर लगे सितारे पूरे राजस्थान की चमक बढ़ा रहे हैं।”
कठिन परिश्रम से पाया मुकाम
अभिषेक की प्रारंभिक शिक्षा माउंट आबू में हुई, जिसके बाद उन्होंने मुंबई के विल्सन कॉलेज से स्नातक किया। विलासिता के रास्तों को छोड़कर उन्होंने CDS जैसी कठिन परीक्षा को चुना। चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में कड़े प्रशिक्षण के बाद, जब अभिषेक ने सेना की वर्दी पहनी, तो उनकी आँखों में वही चमक थी जो एक सच्चे योद्धा की होती है।

मरुधरा के वीरों की परंपरा
राजस्थान की यह धरती हमेशा से वीरों की जननी रही है। अभिषेक ने यह सिद्ध कर दिया है कि आज के दौर में भी सेवा का सबसे बड़ा माध्यम ‘वर्दी’ ही है। उनके चयन से क्षेत्र के युवाओं में नया जोश भर गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस परिवार ने पंचायत के माध्यम से गांव की सेवा की, आज उसी घर का चिराग सरहदों पर देश की सेवा करेगा।
अभिषेक सिंह राठौड़ की यह सफलता यह संदेश देती है कि यदि इरादे फौलादी हों और माता-पिता का आशीर्वाद साथ हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। आज पूरा जालोर जिला अपने इस लाडले पर गर्व कर रहा है। अभिषेक का लेफ्टिनेंट बनना केवल एक पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि उन करोड़ों युवाओं के लिए एक मशाल है जो अपनी मातृभूमि के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा रखते हैं।
सलाम है ऐसे माता-पिता को और जय हिंद उस सपूत को!



