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जयपुर, 5 मई 2025 – राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगमों के पुनर्गठन को लेकर एक बड़ा आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत पहले नगर निकायों में शामिल की गई कई ग्राम पंचायतों को पुनः स्वतंत्र प्रशासनिक अधिकार दे दिए गए हैं।
इस आदेश का उद्देश्य क्या है?
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य स्थानीय प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना और ग्राम पंचायतों को उनके मूल अधिकार वापस देना है। पहले, कई ग्राम पंचायतों को नगर निगमों और नगर परिषदों में सम्मिलित कर दिया गया था, जिससे ग्रामीण स्तर पर प्रशासन में कई चुनौतियां सामने आई थीं। अब, सरकार ने इन पंचायतों को पुनः ग्राम प्रशासन के अंतर्गत लाने का निर्णय लिया है।
आदेश के प्रमुख बिंदु:
✔️ ग्राम पंचायतों की पुनर्स्थापना
- पहले नगर निकायों में शामिल की गई ग्राम पंचायतों को पुनः पंचायती राज संस्थाओं की सीमाओं में शामिल किया गया है।
- जिन ग्राम पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल खत्म हो चुका है, वहां प्रशासक नियुक्त किया जाएगा और प्रशासकीय समिति गठित की जाएगी शेष है, वे पहले की तरह कार्य करती रहेंगी और उनके निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपने पदों पर बने रहेंगे।
✔️ पंचायत समिति और जिला परिषद के सदस्यों की स्थिति
- यदि किसी सदस्य का पूरा वार्ड नगर निगम या नगर परिषद में शामिल हो गया था, तो अब उसे हटाया हुआ माना जाएगा।
- जिन सदस्यों के वार्ड आंशिक रूप से नगर निकायों में सम्मिलित हुए थे, वे अपने पदों पर बने रहेंगे और सामान्य रूप से कार्य करते रहेंगे।
✔️ पंचायत समिति प्रधान और जिला प्रमुख पद
- यदि किसी पंचायत समिति प्रधान या जिला प्रमुख का पद रिक्त हो गया है, तो राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 25 के अनुसार नए प्रावधान लागू किए जाएंगे।
- सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि नए पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया निष्पक्ष और सुचारू रूप से पूरी हो।
इस फैसले का क्या असर होगा?
🔹 ग्राम पंचायतों को अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, जिससे वे अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा पाएंगी।
🔹 स्थानीय प्रशासनिक प्रक्रिया पहले से अधिक सुगम और प्रभावी हो जाएगी।
🔹 ग्राम स्तर पर विकास योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जा सकेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा।
जनता की प्रतिक्रिया
ग्राम पंचायतों के इस पुनर्गठन पर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोग इस फैसले को ग्राम प्रशासन के सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं, तो कुछ को नई व्यवस्था के अनुसार समायोजन में चुनौतियों की चिंता है।
निष्कर्ष
राजस्थान सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय स्थानीय प्रशासन को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। अब यह देखना होगा कि इस फैसले से ग्रामीण विकास की गति कितनी तेज होती है और पंचायतों को उनके प्रशासनिक कार्यों में कितनी सहूलियत मिलती है।



