रानीवाडा। 23 मार्च 2025 को शहीद दिवस के अवसर पर, नागरिकों ने एक अद्वितीय और ऐतिहासिक श्रद्धांजलि अर्पित की। 51 स्क्वायर फीट के विशाल भारत के नक्शे पर 11,000 दीप जलाकर, माँ भारती के वीर सपूतों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को याद किया गया। पूरा कार्यक्रम सेवाडिया महंत रतन भारती महाराज और भाजपा नेता मंजीराम चौधरी की मौजूदगी में हुआ।
यह आयोजन न केवल उनकी शहादत को सम्मानित करने का प्रतीक था, बल्कि यह देशभक्ति और एकता का संदेश भी देता है। शहीद दिवस का महत्व शहीद दिवस हर साल 23 मार्च को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1931 में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी दी थी।

इन तीनों क्रांतिकारियों ने अपने साहस और बलिदान से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। उनकी शहादत ने युवाओं में क्रांति की भावना को जागृत किया और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष को और मजबूत किया। 11,000 दीपों का प्रकाश न केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक भी है। 51 स्क्वायर फीट का भारत का नक्शा, जो इस आयोजन का केंद्र बिंदु था, देश की अखंडता और विविधता का प्रतीक है।
इस अवसर पर देशभक्ति गीत, नृत्य और भाषणों का आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की विरासत भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने अपने जीवन को देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया।

भगत सिंह ने कहा था, “क्रांति मानव जाति का अपरिहार्य अधिकार है।” उनकी यह सोच आज भी युवाओं को प्रेरित करती है। सुखदेव और राजगुरु ने भी अपने अदम्य साहस और बलिदान से यह साबित किया कि स्वतंत्रता के लिए हर बलिदान छोटा है। संदेश इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि देशभक्ति केवल एक भावना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। यह हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता के लिए किए गए बलिदानों को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
इस मौके पर हनुमान भक्त बसंत प्रजापत, महेंद्र देवासी, जोइताराम चौधरी, झालाराम, किरणकुमार, जगदीश जोशी, चेतन प्रजापत सहित कई जाने मौजूद थे।



