लोकतंत्र पर 'खतरा' या बड़ा राजनीतिक घमासान? जालोर में फूटा कांग्रेस का आक्रोश, मुख्य चुनाव आयुक्त का फूंका पुतला!
कलेक्ट्रेट के सामने गूंजे भाजपा विरोधी नारे, दो चुनाव आयुक्तों की 14 बार आपत्तियों के खुलासे के बाद गरमाई सियासत; पूर्व मंत्री सुखराम विश्नोई बोले- राहुल गांधी का शक सही निकला
सर्कल न्यूज नेटवर्क
जालोर। भारत निर्वाचन आयोग के भीतर मचे कथित घमासान और कार्यप्रणाली में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों को लेकर मंगलवार को जालोर की सियासत में जबरदस्त उबाल देखने को मिला। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर जिला कलेक्ट्रेट के सामने मंगलवार सुबह 11 बजे कांग्रेसजनों ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की भाजपा सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से तत्काल इस्तीफे की मांग की।

कलेक्ट्रेट पर उमड़ा कार्यकर्ताओं का हुजूम
जिला कांग्रेस सह प्रभारी दिलीप चौधरी एवं पूर्व मंत्री सुखराम विश्नोई के संयुक्त नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में जिले भर से आए पार्टी पदाधिकारियों और अग्रिम संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। जिला प्रवक्ता योगेंद्र सिंह कुम्पावत ने बताया कि सुबह से ही कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर गहमागहमी का माहौल था। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म करने का आरोप लगाते हुए आक्रोश जताया।
'10 माह में 14 बार आपत्ति, आयोग में चल क्या रहा है?'
सभा को संबोधित करते हुए जिला सह प्रभारी दिलीप चौधरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग के भीतर गहरे मतभेद उजागर हो चुके हैं। पिछले 10 महीनों में दो निर्वाचन आयुक्तों—विवेक जोशी एवं सुखवीर सिंह संधू—ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित रूप से असहमति व आपत्तियां दर्ज कराई हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), नए मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने तथा आयोग के आईटी सिस्टम को पूरी तरह दिल्ली में सेंट्रलाइज्ड करने जैसे संवेदनशील मामलों पर सवाल उठे हैं। उन्होंने दावा किया कि महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में निर्वाचन आयुक्तों तक से जानकारी छिपाई जा रही है, जो सीधे तौर पर चुनावी निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाता है।
राहुल गांधी का अंदेशा सही साबित हुआ: सुखराम विश्नोई
पूर्व मंत्री सुखराम विश्नोई ने कहा कि इस घटनाक्रम ने कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस रुख पर मुहर लगा दी है, जिसमें वे लगातार चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। विश्नोई ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिकरण लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार है। उन्होंने मांग की कि आयोग अपनी कार्यप्रणाली को सार्वजनिक करे और देश के सामने स्थिति साफ करे।
ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद
प्रदर्शन में पूर्व जिलाध्यक्ष नैन सिंह राजपुरोहित, आहोर प्रत्याशी सरोज चौधरी, सभापति बंशीलाल माली, उपसभापति मुमताज अली सैय्यद, संगठन महासचिव वीरेंद्र जोशी, रमेश सोलंकी, ब्लॉक अध्यक्ष भोमाराम मेघवाल, गजेंद्र सिंह डोडियाली, गलबाराम मीणा, हिंदू सिंह दूठवा, एससी जिलाध्यक्ष खसाराम मेघवाल, पूर्व प्रधान पदमाराम सरगरा, सुष्मिता गर्ग, केसाराम मेहरा, कामिनी शर्मा, जाकिर खान, पार्षद बसंत सुथार, लक्ष्मण साखला, सुरेश मेघवाल, नरेश राणा, हरीश परमार, गोपेश कुमार, रिंकु देवी, भंवरलाल मेघवाल, महेंद्र सोनगरा, भानुप्रताप पटेल, सुरेश चौधरी, खीमाराम चौधरी, अनिल पंडत, लक्ष्मीकांत दवे, पुखराज माली, कपिल दवे, अब्दुल रज्जाक, अशोक मेघवाल, अनोप सिंह, लियाकत अली, दिलीप माली, कमल सिंह, उम्मेद सिंह, गोविंद मेघवाल और इंद्र कुमार सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।










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