रानीवाड़ा (सर्कल न्यूज़ नेटवर्क)।
मां भारती के चरणों में समर्पित अमर राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के पावन एवं ऐतिहासिक अवसर पर पूरा देश राष्ट्रभक्ति के अनूठे रंग में रंगा नजर आ रहा है। इसी कड़ी में 'नमामि भारतम्' अभियान के तहत विद्या भारती द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक रानीवाड़ा में अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से एक भव्य, अलौकिक और विहंगम सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रव्यापी आयोजन में जब एक साथ एक हजार से अधिक छात्र-छात्राओं, आचार्यों और प्रबुद्ध नागरिकों ने 'संपूर्ण वंदे मातरम्' का सस्वर गायन किया, तो पूरे परिसर का वातावरण दिव्य देशभक्ति की भावना से सराबोर हो उठा। कार्यक्रम की अध्यक्षता ताराचंद भारद्वाज ने की, जबकि रानीवाड़ा तहसीलदार बाबुसिंह राजपुरोहित मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर बाबुसिंह राजपुरोहित ने कहा कि वंदे मातरम् के 150वें वर्ष का सहभागी बनना हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सवदाराम ने गीत के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला, वहीं विशिष्ठ अतिथि पवन कुमार माहेश्वरी, प्रधानाचार्य कान्तिलाल चौधरी, प्राथमिक प्रधानाचार्य अमरनाथ गोस्वामी तथा प्रबंध समिति के सम्मानित सदस्य, आचार्य बंधु, भगिनी, अभिभावक और भैया-बहन बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
क्या है 'नमामि भारतम्' अभियान?
'नमामि भारतम्' एक राष्ट्रव्यापी सांस्कृतिक और चेतना जगाने वाला अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की महान सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीकों और राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक मील के पत्थर को जन-जन तक पहुंचाना है। इस अभियान के तहत देशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक मंचों पर 'संपूर्ण वंदे मातरम्' के सामूहिक गायन, वैचारिक गोष्ठियों और देशभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसका मूल ध्येय समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और राष्ट्र धर्म से जोड़ना है।
क्यों पड़ी इस अभियान की आवश्यकता?
बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'वंदे मातरम्' केवल पंक्तियां या एक गीत भर नहीं है, बल्कि यह वह अमर मंत्र है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों भारतीयों के दिलों में क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित की थी। आज के आधुनिक युग में, जहां युवा पीढ़ी तेजी से पाश्चात्य संस्कृति और डिजिटल दुनिया की ओर आकर्षित हो रही है, वहां राष्ट्रभक्ति के इस मूल भाव को पुनर्स्थापित करने की महती आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस अभियान की जरूरत इसलिए पड़ी ताकि:
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युवाओं में राष्ट्र प्रथम की भावना जागे: आने वाली पीढ़ी को उस त्याग, तपस्या और ऊर्जा का अहसास कराया जा सके, जो इस मंत्र के साथ जुड़ी हुई है।
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पूर्ण वंदे मातरम् का ज्ञान हो: साधारणतः प्रचलित पंक्तियों से इतर समाज को 'संपूर्ण वंदे मातरम्' के अर्थ और उसकी अंतरात्मा से परिचित कराया जा सके।
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सांस्कृतिक एकता का संचार हो: जब हजारों कंठ एक साथ एक ही लय में राष्ट्रगीत का गायन करते हैं, तो जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर एक अटूट राष्ट्रीय एकता का निर्माण होता है। मुख्य वक्ता सवदाराम के शब्दों में, यह गीत मां भारती के प्रति समर्पण, भक्ति और कर्तव्य का भाव जागृत करने वाली एक अमर कृति और संकल्प है।










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